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30 दिन में 8 बार लेपर्ड रिहायशी इलाकों में दिखा:62 वर्गकिलोमीटर का जंगल, 90-100 लेपर्ड, छोटी पड़ी टेरिटरी, ‘इमरजेंसी प्रिडेटर प्रोटोकॉल’ की जरूरत

शहर के झालाना, आमागढ़ और नाहरगढ़ के लेपर्ड अब लगातार जंगलों से निकलकर घनी आबादी वाले इलाकों में दाखिल हो रहे हैं। बढ़ती संख्या और सिमट रहे जंगल एरिया की वजह से बीते 30 दिनों में ही आठ बार लेपर्ड का मूवमेंट ​रिहायशी इलाकों में हुआ है।

  • राजधानी के तीनों अर्बन फॉरेस्ट आमागढ़, झालाना और बीडपापड़ नाहरगढ़ का कुल क्षेत्र सिर्फ 62 वर्गकिमी है। यहां 90-100 लेपर्ड हैं, जो अब कम पड़ने लगा है।
  • 4 दशक पहले राजधानी में जंगली क्षेत्र 80-85 वर्गकिमी था। मालवीय नगर, जेएलएन मार्ग, आगरा रोड, बजाज नगर और जगतपुरा जैसे क्षेत्र झालाना जंगल का हिस्सा थे, अब जंगल सिकुड़ गया।

भास्कर एक्सपर्ट – जंगली जानवर दिखने पर महाराष्ट्र की तर्ज पर सील करें 5 किमी क्षेत्र

विशेषज्ञ जंगल बचाव व रेस्क्यू संस्था ‘रक्षा’ के रोहित गंगवाल बताते हैं कि महाराष्ट्र की तरह जयपुर में भी ‘इमरजेंसी प्रिडेटर प्रोटोकॉल’ लागू होना चाहिए। वहां रिहायशी इलाके में जंगली जानवर दिखने पर तुरंत 5 किमी रेडियस तक का क्षेत्र सील कर दिया जाता है। जयपुर में इसके अभाव के कारण लेपर्ड भीड़ और शोर से घबरा कर लगातार लोकेशन बदलता रहता है, जिससे रेस्क्यू मुश्किल हो जाता है। पानीपेच और गोपालपुरा में दो-दो दिन तक यही स्थिति बनी रही थी।

रविवार रात अनिता कॉलोनी में दिखा

अ​निता कॉलोनी में रविवार देर रात 12 बजे लेपर्ड एक घर की दीवार कूदकर अंदर घुसा और गार्डन में निकलता दिखा, रविवार सुबह 6:42 बजे एक मकान के बाथरूम से दौड़कर पोर्च में से निकलता दिखाई दिया।

Hind Raftar
Author: Hind Raftar

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