राज्यसभा में भाजपा सांसद मदन राठौड़ ने भारत सरकार की वित्तीय साक्षरता आधारित महत्वपूर्ण पहल ‘निवेशक दीदी चरण-II’ को लेकर कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय से विस्तृत जानकारी मांगी। राठौड़ के सवाल के जवाब में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय एवं सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि निवेशक दीदी योजना विशेष रूप से ग्रामीण और अल्पसेवित क्षेत्रों की महिलाओं के बीच वित्तीय जागरूकता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। निवेशक दीदी चरण-II को 7 अप्रैल 2025 को शुरू किया गया। इसका मुख्य मकसद महिलाओं को सुरक्षित डिजिटल वित्तीय सेवाओं, जिम्मेदार बचत और निवेश निर्णयों की ओर प्रेरित करना, साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी के जोखिमों के प्रति जागरूक करना है।
राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि यह पहल ‘महिलाओं द्वारा-महिलाओं के लिए’ की अवधारणा पर आधारित है। इसके अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों और ग्रामीण डाक विभाग की महिला कर्मचारियों को जोड़कर इंटरएक्टिव प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं। इसमें कहानी कहने, समूह सहभागिता और डिजिटल बैंकिंग के प्रदर्शन जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग किया जाता है, ताकि महिलाएं आसानी से और आत्मविश्वास के साथ वित्तीय ज्ञान प्राप्त कर सकें।
राठौड़ ने बताया कि राजस्थान में भी इस अभियान की प्रभावशाली प्रगति दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2023-24 में 22 जागरूकता शिविर आयोजित किए गए, जबकि 2025-26 में अब तक 10 शिविर लगाए जा चुके है। इस प्रकार, राजस्थान में कुल 32 शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। ये शिविर ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सुविधाओं, डिजिटल भुगतान, बीमा और निवेश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आवश्यक जानकारी प्रदान कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी इस योजना ने तेज़ी पकड़ी है। मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक की अवधि में देशभर में कुल 1,892 वित्तीय जागरूकता शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इससे लाखों महिलाओं तक वित्तीय साक्षरता और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन की जानकारी पहुंची है।
सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि सरकार ने इस योजना के प्रभाव और पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि प्राधिकरण (IEPFA) और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के बीच साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत 4 हजार वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित करने तथा 40 हजार महिला डाक कर्मचारियों को सामुदायिक वित्तीय प्रशिक्षक के रूप में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ाने और घरेलू अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में इस प्रकार की योजनाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस पहल को और अधिक सशक्त बनाया जाए और इसे देश के शेष दूरस्थ क्षेत्रों तक सुनिश्चित रूप से पहुंचाया जाए।






