अलवर जिला अस्पताल की मॉर्चरी से अज्ञात व्यक्ति के शव की गलत पहचान कर परिवार के लोगों को बॉडी थमा दी। अंतिम संस्कार भी हो गया और तीसरे दिन परिवार के लोग अस्थियां विसर्जन करने हरिद्धार जाने लगे तब पुलिस ने फोन कर कहा कि आपकी बाॅडी ले जाओ। जवाब मिला कि हम तो अंतिम संस्कार कर चुके हैं और अस्थि विजर्सन करने जा रहे हैं। किसकी बॉडी की बात कर रहे हो। यह सुनकर पुलिस भी हड़बड़ा गई और मृतक बुजुर्ग के परिजन भी सकपका गए। अस्पताल प्रशासन व पुलिस की लापरवाही का यह बड़ा नमूना सामने आया है।
मॉर्चरी में 3 शव रखे थे, दूसरे का शव थमा दिया
मामला 7 नवंबर का है। उस दिन जिला अस्पातल में 3 अज्ञात व्यक्ति के शव रखे थे। एक का शव एमआईए थाना पुलिस लेकर आई थी। दूसरा शव कोतवाली पुलिस और तीसरा अज्ञात शव जीआरपी पुलिस लेकर आई थी। एमआईए थाना पुलिस वाली बॉडी की पहचान हो गई थी। वे 7 नवंबर को शव लेने जिला अस्पताल आए थे। उनको गलती से जीआरपी पुलिस जो शव लेकर आई थी वह बॉडी थमा दी। जिसकी पहचान भी नहीं हुई थी। परिवार के लोग 7 नवंबर को ही शव का अंतिम संस्कार कर चुके। 9 नवंबर को अस्थि विसर्जन करने के लिए हरिद्वार जा रहे थे। तभी पुलिस का फोन आ गया। उसके बाद पूरा मामला सामने आ गया।






