बारबाडोस की राजधानी ब्रिजटाउन में आयोजित 68वें राष्ट्र मण्डल संसदीय संघ के सम्मेलन में हुई बैठक में भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला भागीदारी जैसे संवेदनशील नीति निर्माण की दिशा के ऐतिहासिक कदम की सराहना हुई। राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सम्मेलन में लोकतंत्र को समर्थन देने वाली संस्थाओं के सुदृढीकरण विषय पर आयोजित बैठक में कहा कि इस निर्णय से भारत में लोकतंत्र के प्रति महिलाओं में अपार उत्साह बढ़ा है। समाज के सभी वर्ग निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनने से लोकतंत्र और अधिक मजबूत हुआ है।
चुनावी संस्थाओं की बड़ी विश्वसनीयता, मतदान में रिकार्ड स्तर पर वृद्धि- देवनानी ने बताया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन के कामकाज में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के सिद्धान्तों को चुनाव आयोग द्वारा निरन्तर बनाये रखने से उच्च स्तर की मतदाता भागीदारी के साथ विधान सभा और स्थानीय निकाय चुनावी में मतदान 71.64 प्रतिशत तक पहुँच गया। उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर मतदान प्रतिशत 85 से 87 प्रतिशत ने रिकार्ड उच्च स्तर बनाया है।
भारत में महिलाएं सुरक्षित- सम्मेलन लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और वित्तीय स्वायत्तता जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित है। राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि भारत में महिलाएं सुरक्षित है। चुनावों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से लोकतंत्र मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि राजस्थान जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। राजस्थान, डिजिटिलिकरण, कल्याणकारी कानून निर्माण और मतदाता जागरूकता अभियान जैसे स्थानीय नवाचारों से लोकतंत्र की जीवन्तता को बनाते हुए भविष्य की स्थिरता को सुनिश्चित कर रहा है।
राउंड टेबल डिस्कशन में साझा हुए सार्थक सुझाव- सम्मेलन में आयोजित राउंड टेबल डिस्कशन में विभिन्न देशी के संसदीय प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान मुख्य रूप से संस्थाओं की वित्तीय स्वायतता, संसदीय समितिर्या की भूमिका एवं प्रभावशीलता, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण, संस्थागत पारदर्शिता और उत्तरदायित्व, तकनीकी नवाचार और जनसहभागिता विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र की सच्ची शक्ति उन संस्थाओं में है जो जनता की आवाज़ को सुनती है, समझती हैं और उस पर अमल करती हैं। देवनानी ने भारतीय परिप्रेक्ष्य में अपने सुझाव प्रस्तुत किए और कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में लोकतांत्रिक निर्णय होते हैं।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की गरिमामयी उपस्थिति- सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सहित विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष शामिल हुए है।
राजस्थान विधानसभा ने जनसहभागिता, डिजिटल नवाचार और पारदर्शी कार्यसंचालन- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र संस्थाओं की आत्मा में बसता है जो जनता के विश्वास को संभालती है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता, वित्तीय स्वायत्तता और पारदर्शिता ही लोकतंत्र की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा ने जनसहभागिता, डिजिटल नवाचार और पारदर्शी कार्यसंचालन के माध्यम से संस्थागत सुदृढीकरण की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। ऑनलाइन प्रश्नकाल प्रणाली, ई-विधान प्रक्रिया और विधानसभा संग्रहालय जैसे नवाचारों से राजस्थान विधान सभा लोकतंत्र को अधिक सुलभ और उत्तरदायी बनाने में सहयोगी बन रही है।
संस्थाओं की वितीय स्वायतता पर जोर- विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने संस्थागत स्वायत्तता पर चर्चा करते हुए सहमति जताई कि वित्तीय स्वतंत्रता ही किसी संस्था की कार्यक्षमता का आधार होती है। देवनानी ने इस संदर्भ में कहा कि जब विधान संस्थाएँ अपने वित्तीय निर्णय स्वयं ले सकेंगी, तभी वे प्रशासनिक दबावों से मुक्त होकर जनहित में कार्य कर पाएंगी। यह लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
वैश्विक साझेदारी और लोकतांत्रिक संवाद का मंच सम्मेलन- 68वें कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन ने विश्व के लोकतांत्रिक राष्ट्रों को एक साझा मंच पर लाकर यह संदेश दिया कि संस्थाएँ तभी सशक्त होगी जब उनमें पारदर्शिता, और नैतिक उत्तरदायित्व का समन्वय होगा। यह आयोजन वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ करने और लोकतांत्रिक शासन की गुणवत्ता को उन्नत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है।






