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‘दाग’ धुलने के 35वें दिन ASP का निधन:रेप-केस इन्वेस्टिगेशन में लापरवाही व षड्यंत्र के लगे थे आरोप, हाईकोर्ट ने दी थी राहत

जैसलमेर में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सिकाउ) राजूराम चौधरी का आज निधन हो गया। वे पिछले करीब डेढ़ साल से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे।

राजूराम चौधरी के लिए यह एक विडंबना ही रही कि उन्होंने अपने दामन पर लगे ‘लापरवाही’ और ‘षड्यंत्र’ के दाग को मिटाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, और जब हाईकोर्ट ने उनके सम्मान की रक्षा की, तो वे उस जीत को ज्यादा दिन जी नहीं सके। हाईकोर्ट के फैसले के महज 35 दिन बाद ही उन्होंने अंतिम सांस ली।

अंतिम समय में मिली सबसे बड़ी राहत

राजूराम चौधरी पिछले करीब डेढ़ साल से न केवल शारीरिक बीमारी से जूझ रहे थे, बल्कि मानसिक तनाव से भी गुजर रहे थे। यह तनाव बालेसर (जोधपुर) में तैनाती के दौरान की गई एक जांच को लेकर निचली अदालतों द्वारा की गई बेहद तल्ख टिप्पणियों के कारण था। हालांकि, नियति ने उन्हें दुनिया से जाने से पहले एक सुकून जरूर दिया।

13 जनवरी 2026 को ही राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस फरजंद अली ने रिपोर्टेबल जजमेंट देते हुए उनके खिलाफ निचली अदालतों द्वारा की गई सभी प्रतिकूल टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने माना था कि बिना सुने किसी अधिकारी को ‘षड्यंत्रकारी’ नहीं कहा जा सकता। अगर वह फैसला उनके पक्ष में न आता, तो शायद वे अपने सीने पर यह बोझ लेकर जाते, लेकिन वे ‘बेदाग’ होकर दुनिया से विदा हुए।

राजूराम मूल रूप से बालोतरा के गिड़ा में चिबी के रहने वाले थे और हाल जोधपुर के सरस्वती नगर में रहते थे। वह काफी समय से अहमदाबाद के हॉस्पिटल में भर्ती थे।

क्या था वो मामला जिसने दिया तनाव?

जब राजूराम चौधरी बालेसर में वृत्ताधिकारी (सीओ) थे, तब उन्होंने एक रेप केस की जांच की थी। उन्होंने सबूतों के अभाव में रेप की धाराओं में एफआर लगा दी थी और आरोपी पर सिर्फ आईटी एक्ट का केस माना था। इस पर निचली अदालतों ने बेहद सख्त रुख अपनाया था।

  • सेशन कोर्ट ने कहा था कि जांच अधिकारी ने “दुर्भावना या षड्यंत्र” के तहत काम किया।
  • सीजेएम कोर्ट ने इसे “घोर लापरवाही” बताते हुए डीजीपी को उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दे दिए थे।

इन टिप्पणियों ने एक पुलिस अधिकारी के तौर पर उनके करियर और प्रतिष्ठा पर सवालिया निशान लगा दिया था, जिसे लेकर वे हाईकोर्ट गए थे।

बीमारी और कानूनी संघर्ष साथ-साथ

जानकारी के मुताबिक, राजूराम पिछले डेढ़ साल से गंभीर बीमार थे। एक तरफ वे जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे, तो दूसरी तरफ उनके वकील हाईकोर्ट में उनके सम्मान की लड़ाई लड़ रहे थे। 13 जनवरी को जब हाईकोर्ट ने डीजीपी को भेजी गई शिकायत निरस्त की और टिप्पणियां हटाईं, तो यह उनके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं था। लेकिन विधि का विधान देखिए, सम्मान वापस पाने के ठीक एक महीने और 5 दिन बाद वे इस दुनिया को अलविदा कह गए।

पुलिस महकमे में शोक की लहर

राजूराम चौधरी वर्तमान में जैसलमेर में एएसपी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट, क्राइम अगेंस्ट वुमन) के पद पर तैनात थे। उनके निधन की खबर से पुलिस महकमे में शोक की लहर है। साथी अधिकारियों का कहना है कि वे एक सुलझे हुए अधिकारी थे, जिन्होंने अंतिम समय तक अपने आत्मसम्मान के लिए संघर्ष किया।

Hind Raftar
Author: Hind Raftar

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