जोधपुर में एनेस्थीसिया के डॉक्टर की नींद में हार्ट-अटैक से मौत हो गई। परिवार के अनुसार वे रविवार (31 अगस्त) रात को जब सोए थे, तब उनकी तबीयत ठीक थी।
सोमवार (1 सितंबर) सुबह परिवार ने उन्हें जगाने की कोशिश की। उनकी बॉडी में कुछ मूवमेंट नहीं हुआ तो उन्हें नजदीक के हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
वहां डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉ प्रकाश गुप्ता (48) के पिता पीके गुप्ता भी डॉक्टर हैं और एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल रहे हैं।
कमर में दर्द की शिकायत थी
परिवार के अनुसार डॉ प्रकाश प्राइवेट हॉस्पिटल में एनेस्थीसिया एक्सपर्ट थे। पिछले कुछ दिनों से उन्हें कमर में दर्द की शिकायत थी। इस वजह कुछ दिन हॉस्पिटल भी नहीं गए थे।
रविवार को ही वापस काम पर लौटे थे। डॉ. गुप्ता के परिवार में माता-पिता, पत्नी और बेटा हैं। जांच करने वाले डॉक्टर्स हार्ट-अटैक से मौत की आशंका जताई है।
पहले नहीं मिल रहे संकेत
डॉक्टर दीपक माहेश्वरी ने बताया- आज कल हार्ट अटैक के अधिकांश केसों में वॉर्निंग साइनिंग नहीं आ रहे। मरीज को अचानक तेजी से दर्द होने के बाद हॉस्पिटल लाया जाता है।
जांच में पता चलता है कि मरीज की आर्टरी में 90-95 फीसदी या उससे भी ज्यादा का ब्लॉकेज हैं। वहीं, कई केस में व्यक्ति के कार्डियक अरेस्ट भी हो जाता है, जिसमें जान चली जाती है
40 की उम्र के बाद रूटीन जांच करवाते रहना चाहिए
डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया- सर्दियों में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के केस ज्यादा आते हैं। इसके पीछे कारण प्लेटलेट्स की एक्टिविटी बढ़ने के साथ ही डिहाइड्रेशन होना। शरीर की मुख्य धमनियों का सिकुड़ना है।
इस तरह के केस आने का खतरा सबसे ज्यादा हाई रिस्क ग्रुप के लोगों में रहता है। हाईरिस्क की श्रेणी में ऐसे व्यक्ति आते हैं, जिनको शुगर और बीपी की लम्बे समय से बीमारी है। फैमिली हिस्ट्री (हार्ट अटैक की) है। ऐसे लोगों को अपना रूटीन चैकअप करवाते रहना चाहिए।
पहले भी 2 डॉक्टरों की हो चुकी है मौत
जोधपुर में बीते करीब 9 महीने में 3 बड़े डॉक्टर्स की मौत हुई है। डॉ प्रकाश से पहले डॉ. राजीव गहलोत (52), जो वसुंधरा अस्पताल में कार्यरत थे, उनकी प्लेटलेट्स गिरने दिसंबर 2024 को मौत हुई थी।
उन्होंने 5,000 से अधिक हार्ट सर्जरी की थीं। वहीं, एमजी अस्पताल में मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. विनीत तिवारी (45) की भी इसी दौरान मौत हुई थी। उनका लिवर खराब था।






