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राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क मोदी सरकार का युवाओं को भविष्य की शिक्षा से जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम:— मदन राठौड़

राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने संसद के पटल पर शैक्षणिक और व्यावसायिक शिक्षा के एकीकरण से जुड़े राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) पर सरकार की प्रगति को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न लगाया। राठौड़ के सवाल पर शिक्षा राज्य मंत्री जयन्त चौधरी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत देश की शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, कौशल आधारित और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए एनसीआरएफ को लागू किया जा रहा है। यह फ्रेमवर्क शिक्षा में अकादमिक क्रेडिट, कौशल प्रशिक्षण और अनुभवात्मक अधिगम को समान मान्यता देने का काम करेगा। उन्होंने बताया कि यह फ्रेमवर्क स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक छात्रों को अपनी शिक्षा में अधिक विकल्प चुनने का अधिकार देगा। इससे छात्र पढ़ाई के बीच कौशल प्रशिक्षण लेकर, फिर वापस मुख्य विषयों में आसानी से प्रवेश ले सकेंगे। इसे एक एकीकृत मेटा-फ्रेमवर्क कहा गया है। मोदी सरकार ने राज्यों और बोर्डों को एनसीआरएफ लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पहले ही जारी कर दी है। सीबीएसई और एआईसीटीई जैसे संस्थान अपने-अपने स्तर पर विशेष कार्यशालाएँ और दिशा-निर्देश जारी कर चुके हैं और इसे जमीनी स्तर पर लागू कराने के प्रयास जारी हैं।

राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि उच्च शिक्षा में प्रवेश–निकास को लचीला बनाने के लिए एआईसीटीई ने यह व्यवस्था भी शामिल की है कि कौशल आधारित 3- वर्षीय डिग्री वाले छात्र सीधे बी.टेक के दूसरे वर्ष में लेटरल एंट्री ले सकते हैं। यह भारत में कौशल शिक्षा को बढ़ावा देने वाली ऐतिहासिक पहल कही जा रही है। इसके साथ ही अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) को इस तरह विकसित किया गया है कि छात्र विभिन्न संस्थानों में अर्जित क्रेडिट को सुरक्षित रूप से जमा कर सकें और आवश्यकता के अनुसार स्थानांतरित कर सकें। प्रत्येक छात्र को डिजिटल पहचान एपीएएआर-आईडी जारी की जा रही है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क को एनएचईक्यूएफ के साथ जोड़ा गया है, जिससे कौशल और उच्च शिक्षा क्षेत्र के बीच की दूरी खत्म हो रही है और छात्र स्तर 3 से 4.5 तक योग्यता हासिल कर आगे की पढ़ाई कर सकेंगे। इस पूरी प्रणाली को डिजिटल और साइबर सुरक्षित बनाने के लिए एनसीआरएफ को डिजीलॉकर और नेशनल अकादमिक डिपॉजिटरी से एकीकृत किया गया है। क्रेडिट डेटा को डिजिटल हस्ताक्षर, क्यूआर आधारित सत्यापन और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ सुरक्षित किया जा रहा है। डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट लॉग, केवाईसी आधारित प्रमाणीकरण, और साइबर सिक्योरिटी ऑडिट जैसी तकनीकों को लागू किया जा रहा है, जिससे किसी भी तरह के दुरुपयोग की संभावना समाप्त हो जाएगी। मोदी सरकार का यह प्रयास देश के करोड़ों युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, कौशलयुक्त और वैश्विक स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Hind Raftar
Author: Hind Raftar

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