जेडीए की नाक के नीचे अवैध कॉलोनी का विस्तार, पुलिस की चौकसी भी कठघरे में — आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा निर्माण?
हिंद रफ्तार,जयपुर
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भ्रष्टाचार, भू-माफियाओं और अवैध निर्माणों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देशों के बावजूद जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के जोन-14 क्षेत्राधिकार में तिवाड़ी वाले बालाजी के पास कृषि भूमि पर विकसित की जा रही ‘शिव हेरीटेज’ कॉलोनी गंभीर सवालों के घेरे में है। आरोप हैं कि कृषि भूमि पर नियमों को दरकिनार कर आवासीय विला बनाए जा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।

यदि इन आरोपों की जांच में पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार को मिलने वाले भू-रूपांतरण शुल्क, विकास शुल्क, अनुमोदन शुल्क तथा अन्य वैधानिक राजस्व की संभावित करोड़ों रुपये की हानि का भी विषय बन सकता है।
राजस्व को नुकसान, मुनाफा कॉलोनाइजर का!

जानकारों का कहना है कि जब कृषि भूमि को नियमानुसार आवासीय उपयोग में परिवर्तित किए बिना कॉलोनी विकसित की जाती है, तो सरकार को मिलने वाले विभिन्न शुल्कों की संभावित हानि होती है। वहीं अवैध रूप से विकसित कॉलोनियों से निजी लाभ कमाने वालों को आर्थिक फायदा मिलता है, जबकि सरकारी खजाना प्रभावित होता है।


निर्माण चलता रहा… जिम्मेदार विभाग देखते रहे?
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में निर्माण गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं। यदि ऐसा है, तो सवाल उठता है कि जेडीए के निरीक्षण तंत्र ने क्या कार्रवाई की? क्या निर्माण स्थल का निरीक्षण हुआ? क्या नोटिस जारी किए गए? यदि किए गए, तो निर्माण कैसे जारी रहा?
तत्कालीन डीआईजी कैलाश विश्नोई ने भी दिए थे स्पष्ट निर्देश
जयपुर पुलिस के तत्कालीन डीआईजी कैलाश विश्नोई ने अवैध निर्माणों और अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाने के लिए निर्देश जारी किए थे कि हर संबंधित पुलिस थाना अपने क्षेत्र में ऐसे निर्माणों पर सतत निगरानी रखे और तत्काल संबंधित विकास प्राधिकरण को सूचना देकर कार्रवाई सुनिश्चित कराए।
ऐसे में यदि ‘शिव हेरीटेज’ में निर्माण कार्य लगातार जारी रहने के आरोप सही हैं, तो यह भी जांच का विषय है कि संबंधित पुलिस थाने ने क्या निगरानी रखी, क्या किसी प्रकार की सूचना जेडीए को भेजी गई, और यदि भेजी गई तो उस पर क्या कार्रवाई हुई?
जीरो टॉलरेंस नीति पर भी उठे सवाल
राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का उद्देश्य अवैध निर्माण, भू-माफियाओं और भ्रष्टाचार पर कठोर अंकुश लगाना है। ऐसे में यदि कृषि भूमि पर कथित रूप से अवैध कॉलोनी विकसित हो रही है और निर्माण कार्य जारी है, तो संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आती है।
उक्त कॉलोनी पर बनते सवाल
क्या कृषि भूमि पर नियमानुसार अनुमति लिए बिना विला बनाए जा रहे हैं?
सरकार के संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
जेडीए अब तक क्या कार्रवाई कर चुका हैं?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
क्या भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी या निर्माण पूरा होने का इंतजार किया जाएगा
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