एनजीटी का बड़ा डंडा: आरक्षित वन भूमि पर निर्माण रुका, जयपुर के हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट पर संकट

अवैध निर्माण पर एनजीटी सख्त, बिना मंजूरी चल रहे कार्यों पर तत्काल रोक — तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
हिंद रफ्तार,जयपुर
राजधानी जयपुर में आरक्षित वन भूमि पर निर्माण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपेक्स सर्कल से जगतपुरा आरओबी तक प्रस्तावित 200 फीट सड़क परियोजना से जुड़े निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। एनजीटी ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है।
एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा कि बिना आवश्यक पर्यावरणीय और वैधानिक मंजूरी के किसी भी प्रकार का निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही आदेश दिया गया है कि मामले की अंतिम सुनवाई तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखी जाए।
40 फीट वन भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियों का आरोप
याचिका में गंभीर आरोप लगाया गया है कि जहां 200 फीट सड़क बनाई जानी थी, वहां केवल लगभग 160 फीट सड़क का निर्माण किया गया*, जबकि शेष करीब 40 फीट आरक्षित वन भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। यदि यह आरोप सही पाया गया तो यह वन संरक्षण कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

वन भूमि का उपयोग केवल सड़क के लिए, कारोबार के लिए नहीं
वर्ष 2009 में इस सड़क के लिए केंद्र सरकार से पर्यावरणीय मंजूरी मिली थी, लेकिन यह मंजूरी वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की कड़ी शर्तों के साथ दी गई थी। शर्तों में स्पष्ट था कि वन भूमि का उपयोग केवल सड़क निर्माण और यातायात के उद्देश्य से होगा, दोनों ओर वृक्षारोपण किया जाएगा तथा भूमि का स्वामित्व वन विभाग के पास ही रहेगा। किसी भी परिस्थिति में इस भूमि का उपयोग व्यावसायिक या अन्य गैर-वन गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता।
जांच समिति करेगी मौके का निरीक्षण
एनजीटी द्वारा गठित समिति में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। समिति स्थल का निरीक्षण कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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बढ़ सकती हैं कई विभागों की मुश्किलें
एनजीटी की सख्ती के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) सहित संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यदि जांच में नियमों की अनदेखी या वन भूमि का दुरुपयोग साबित होता है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हिंद रफ्तार की नजर
*“वन भूमि पर विकास या नियमों का उल्लंघन? एनजीटी की जांच तय करेगी कि सड़क बनी या कानून कुचला गया। अब सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं।”






