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अतिक्रमण का मामला:प्रदेश में हाइवे पर 2216 अतिक्रमण इनमें 1232 कब्जे कॉमर्शियल रूप में

राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों के रास्तों (आरओडब्ल्यू) के भीतर कुल 2216 अतिक्रमण हैं। इसमें सबसे ज्यादा 1232 व्यावसायिक अतिक्रमण हैं जिनमें होटल-ढाबे शामिल हैं। डीबी स्टार की पड़ताल में चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि 70 फीसदी अतिक्रमण तो राजस्थान के सिर्फ 4 जिलों धौलपुर, भरतपुर, जयपुर, दौसा के हाइवे मार्ग में ही हैं।

जोधपुर की बात करें तो यहां हाइवे पर कुल 32 अतिक्रमण हैं वहीं कोटा, बीकानेर में एक भी अतिक्रमण नहीं है। गौरतलब है कि हाइवे की सड़क सीमा के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर तक किसी प्रकार का निर्माण अवैध हैं। पिछले माह जैसलमेर हाइवे पर केरू सरहद पर एक बस-ट्रेलर भिड़ंत में 4 जनों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

दुर्घटना स्थल के पास ही गोचर भूमि पर धर्मकांटा है। डीबी स्टार ने इसका खुलासा किया था। इस पर हाईकोर्ट ने पूरे प्रदेश के हाइवे सीमा में बने धर्मकांटों -रॉयल्टी नाकों सहित किसी प्रकार के अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया था। इसी को लेकर हाइवे, पीडब्लूडी के अफसरों ने ये आंकड़े उपलब्ध कराए।

देश में सड़कों पर कुल हादसों में 30% हादसे व 60% से अधिक मौतें केवल राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर

वर्ष 2023 के दौरान 4,80,583 सड़क दुर्घटनाएं और 1,72,890 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें से लगभग 20.4% पैदल यात्री थे। राष्ट्रीय राजमार्ग देश की कुल सड़क लंबाई का लगभग 2% ही हैं, फिर भी कुल सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में से करीब 30% इन्हीं राजमार्गों पर होती हैं और 60% से अधिक मौतें राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर होती हैं, जहां वाहनों की गति अधिक होती है और सड़क किनारे पहुंच को सख्ती से विनियमित किया जाना आवश्यक है।

अब प्राधिकरण व पीडब्लूडी की स्वीकृति के बिना राजमार्गों पर लाइसेंस, एनओसी व्यापार अनुमोदन नहीं| राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों की आरओडब्ल्यू/सड़क भूमि सीमा के भीतर सभी कब्जे स्वतः अवैध माने जाएंगे और नियमित नहीं किए जा सकेंगे। कोई भी विभाग, प्राधिकरण या स्थानीय निकाय राजमार्ग सुरक्षा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली किसी भी साइट के लिए कोई लाइसेंस, एनओसी, अनुमति, उपयोगिता कनेक्शन या व्यापार अनुमोदन तब तक प्रदान या नवीनीकृत नहीं करेगा, जब तक कि एनएचएआई/पीडब्ल्यूडी से पूर्व स्वीकृति प्राप्त न हो जाए।

Hind Raftar
Author: Hind Raftar

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