पिता की अस्थियों का विसर्जन कर हरिद्वार से पाली लौट रहे बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई। रामलाल जोशी (45) पाली शहर के शिवाजी नगर के रहने वाले थे। इस हादसे में उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
हादसा बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे किशनगढ़ के बांदरसिंदरी थाना क्षेत्र में हुआ। 5 दिन बाद 8 सितंबर को पिता का बारहवां था। इधर, रामलाल के मौत की खबर सुन परिवार वाले बेसुध हो गए।

कपड़ा फैक्ट्री में ठेकेदार, गणेश चतुर्थी के दिन पिता का हुआ था देहांत रामलाल जोशी पाली शहर में ही कपड़ा फैक्ट्री में ठेकेदारी करते है। उनके पिता हरिराम जोशी (92) का गणेश चतुर्थी के दिन 27 अगस्त को बीमारी की वजह से देहांत हो गया था।
1 सितंबर को रामलाल जोशी अपने पिता के अस्थि विसर्जन के लिए पाली से कार लेकर हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे। बुधवार को वे दोबारा पाली लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी कार आगे चल रहे ट्रेलर ने अचानक ब्रेक लगा दिया।
ब्रेक लगते ही कार ट्रेलर से भिड़ गई। रामलाल कार के आगे वाली सीट पर बैठे थे। ऐसे में उनके सिर पर चोट लगी और मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में उनकी कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई।

परिवार के लोग थे सवार थाना अधिकारी अमरचंद बाकोलिया ने बताया- रामलाल के साथ गाड़ी में मंजू, कविता, दीपक, ड्राइवर पवन, पूरण, ज्योति और चंद्रा सवार थे। ये बुरी तरह से घायल हो गए। हादसे के बाद इन्हें किशनगढ़ के जिला अस्पताल लाया गया।
इस हादसे में मंजू और ड्राइवर पवन की हालात गंभीर होने पर उन्हें अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल रेफर किया गया। उन्होंने बताया कि कार में करीब 13 लोग सवार थे।
कार में हरिराम की बेटी बेटी मंजू (48), चंद्रा (50), पोती कविता (28), प्रियंका (16), पोता दीपक उर्फ ज्ञानप्रकाश (22), पूरण (35), अनिल (14) पोते की बहू ज्योति (26) पत्नी पुरण जोशी, जवाई दुष्यंत (25) समेत पड़पोता वेदांत (7) पुत्र पुरण जोशी और हार्दिक (5) पुत्र पुरण जोशी कार में सवार थे।
पिता की मौत को 12 दिन भी नहीं हुए थे, परिवार ने बेटा खोया रामलाल के 3 बच्चे है। इनमें 18 साल का अनिल, 16 साल की प्रियंका और 14 साल का अनिल। हादसे की खबर सुनते ही पाली में उनके परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। परिवार के लोग तुरंत किशनगढ़ हॉस्पिटल के लिए रवाना हुए और घायलों को संभाला। 8 सितम्बर को मृतक हरिराम जोशी का 12वां था। इससे पहले ही बेटे की हादसे में मौत हो गई। ऐसे में परिवार पर तो मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।






