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चारभुजा नाथ मंदिर में जलझूलनी एकादशी पर उमड़े श्रद्धालु:‘छोगाला छैल की जय’ के गूंजे जयकारे, शाही लवाजमे के साथ दूधतलाई पधारेंगे ठाकुरजी

राजसमंद के चारभुजा में मेवाड़ के प्रसिद्ध धाम चारभुजा नाथ मंदिर में जलझूलनी एकादशी पर कस्बे में श्रद्धा और उल्लास का माहौल है। मंदिर में सुबह से ‘हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की’ और ‘छोगाला छैल की जय’ के जयकारे गूंज रहे हैं।

कस्बे में जलझूलनी एकादशी मेले में भाग लेने के लिए 1 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। श्रद्धालु ठाकुरजी की शाही लवाजमे के साथ निकलने वाली शोभायात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

साल में केवल 2 बार होता है विशेष श्रृंगार मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराए गए। सुबह 5 बजे मंगला दर्शन खुले और 6:30 बजे मंगला आरती हुई। इसके बाद 7:45 बजे श्रृंगार का क्रम शुरू हुआ। ठाकुरजी को पुजारी ने सोने के घड़े में जल भरकर स्नान कराया, फिर पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक हुआ। इसके बाद ठाकुरजी को सफेद पोशाक और हीरे-मोती जड़ित आभूषण पहनाकर राज-श्रृंगार किया गया। यह विशेष श्रृंगार साल में केवल 2 बार ही होता है।

बेवाण की तैयारियां शुरू हुई 10 बजे से ठाकुरजी के बेवाण की तैयारियां शुरू हुई। वहीं महिलाओं ने बावड़ी से जल भरकर लाकर राजभोग झांकी के लिए अर्पित किया। दोपहर 12 बजे ठाकुरजी की राजभोग आरती होगी, जिसमें केसरिया भात, लापसी और चावल का भोग लगाया जाएगा।

चारभुजा नाथ की श्रृंगारित प्रतिमा ।
चारभुजा नाथ की श्रृंगारित प्रतिमा ।

सोने के बेवाण में जाते है, चांदी के बेवाण में लौटते है ठाकुरजी सोने का बेवाण, जिसे “रेवाड़ी का पंडा” कहलाने वाले पुजारी दूधतलाई तक लेकर जाते हैं, शाही लवाजमे के साथ रवाना होगा। इस दौरान 500 से अधिक पुजारी परिवार के सदस्य लाल मेवाड़ी पगड़ी और सफेद धोती पहनकर ठाकुरजी के साथ चलते हैं। शोभायात्रा में सोने-चांदी के गोटे, भाले, भीम गदा, तलवार और बंदूक लिए पुजारी आगे चलते हैं। श्रद्धालु ठाकुरजी पर अबीर-गुलाल उड़ाते हैं।

रामी तलाई के पास ठाकुरजी कुछ समय विश्राम करेंगे, जहां हरजस गान होगा। इसके बाद ठाकुरजी का बेवाण दूधतलाई पहुंचेगा। यहाँ पहले पुजारी स्नान करते हैं और फिर दूधतलाई के जल से ठाकुरजी को स्नान कराया जाता है। ठाकुरजी की परिक्रमा कराई जाती है, इस दौरान उन्हें केवड़े के पत्तों में लपेटकर पुजारी सिर पर रखते हैं। श्रद्धालु भी ठाकुरजी पर जल छिड़कते हैं।

इसके बाद ठाकुरजी का श्रृंगार कर अमल का भोग अर्पित किया जाएगा और फिर चांदी के बेवाण में ठाकुरजी को वापस मंदिर लाया जाएगा। मंदिर में शाम को उत्थापन झांकी और संध्या आरती तक दर्शन रहेंगे। रात 8 बजे से लेकर 10:30 बजे तक विशेष दर्शन खुलेंगे।

इन फोटोज में देखिए जलझूलनी एकादशी पर्व का माहौल

जलझूलनी एकादशी पर गुर्जर पुजारी परिवार लाल मेवाड़ी पगड़ी और सफेद धोती।
जलझूलनी एकादशी पर गुर्जर पुजारी परिवार लाल मेवाड़ी पगड़ी और सफेद धोती।
ठाकुरजी के बेवाण निकलने से पहले पुजारी परिवार अस्त्र-शस्त्र के साथ तैयार रहता है।
ठाकुरजी के बेवाण निकलने से पहले पुजारी परिवार अस्त्र-शस्त्र के साथ तैयार रहता है।
शोभायात्रा के दौरान 2 KM दूधतलाई मार्ग पर गुलाल की लाल परत जम जाती है।
शोभायात्रा के दौरान 2 KM दूधतलाई मार्ग पर गुलाल की लाल परत जम जाती है।
दूधतलाई, जहां ठाकुरजी को स्नान कराया जाता है।
दूधतलाई, जहां ठाकुरजी को स्नान कराया जाता है।
Hind Raftar
Author: Hind Raftar

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