राजस्थान गर्वमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में लगातार हो रहे फर्जीवाड़े को देखते हुए हेल्थ डिपार्टमेंट ने इसकी जांच करने वाले संबंधित अधिकारियों के लिए नई गाइडलाइन की है। इस गाइडलाइन के तहत अब प्राइवेट डॉक्टर के लिखे प्रिस्क्रीप्शन (नुस्खे) पर अगर कोई सरकारी डॉक्टर लाभार्थी को सरकारी पर्ची पर दवा लिखता है तो उस पर कार्यवाही हो सकती है। इसके लिए सरकारी डॉक्टर को पर्ची पर मरीज की जांच रिपोर्ट, बीमारी के लक्षण और बीमारी की हिस्ट्री लिखना जरूरी होगा।
डिपार्टमेंट की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक आरजीएचएस के तहत हो रही गड़बड़ी की जांच के लिए जिलों में सीएमएचओ (मुख्य जिला एवं स्वास्थ्य अधिकारी) और पीएमओ (प्रमुख चिकित्सा अधिकारी) को जिम्मेदारी सौंपी है। इन अधिकारियों को आरजीएचएस के तहत कुछ ऐसे प्रकरणों पर नजर रखने के लिए कहा है, जिनमें लगातार पिछले कुछ सालों से गड़बड़ी मिल रही है।
इस गाइड लाइन में उन बिलों पर भी नजर रखने के लिए कहा है, जहां एक ही परिवार में एक से ज्यादा सदस्यों को एक ही तरह की बीमारी है और एक ही दिन में समान प्रकार की महंगी दवाईयां सरकारी डॉक्टरों से लिखवाकर खरीद कर रहे है। ऐसे प्रकरणों पर भी इन अधिकारियों को विशेष जांच करने के निर्देश दिए है।
वित्तवर्ष के आखिरी तीन माह में ज्यादा बिल उठाने वालों पर निगरानी
इस गाइडलाइन में बताया- कि अक्सर कई लाभार्थी और फर्मासिस्ट ऐसे है, जो वित्तवर्ष के आखिरी तीन माह में ज्यादा दवाईयां लेते है और क्लेम के लिए बिल पेश करते है। दरअसल ऐसा इसलिए करते है ताकि लाभार्थी को मिलने वाली एक साल में 50 हजार रुपए तक की वार्षिक सीमा को खत्म कर सके। ऐसे कई प्रकरणों में गड़बड़ी सामने आई है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे बिलों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए है।
बिना जांच और टिप्पणी के महंगी दवाईयां लिखने पर भी हो जांच
अक्सर कई सरकारी और प्राइवेट डॉक्टर मरीज की ओपीडी पर्ची पर जांचे लिख देते है, लेकिन उन पर कोई टिप्पणी नहीं करते। इसके बाद महंगी दवाईयां लिख देते है। ऐसी पर्चियों की जांच भी सीएमएचओ को करने के निर्देश दिए है।






