मेड़ता – गणेश चतुर्थी पर कई जगहों पर इको फ्रेंडली गणेश मूर्तियां बनाई गई हैं. ऐसा ही एक नवाचार श्री कल्पतरु संस्थान ने किया है. गणेश चतुर्थी के मौके पर संस्थान के कार्यकर्ताओं ने इको फ्रेंडली गणेश मूर्तियां बनाई हैं. मिट्टी की मूर्तियों में कई प्रजाति के पौधों के बीज रखे गए हैं. विसर्जन के बाद यह बीज पौधों में बदल जाएंगे. संस्थान के ग्रीन बचपन अभियान का नेतृत्व कर रही पांच वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता विवेन पारीक ने बताया कि आजकल ज्यादातर मूर्तियां पीओपी की बनती हैं. इसीलिए हमने मिट्टी की मूर्ति बनाई हैं. इन प्रतिमाओं के बीच में कई प्रजातियों के पौधों के बीज रखे गए हैं. जो विसर्जन के कुछ दिनों बाद ही पौधों में बदल जाएंगे. विवेन बताती हैं कि कुछ दिनों से संस्थान के अनेक वॉलिंटियर्स को बीज रखकर गणेश प्रतिमा बनाने की विशेष ट्रेनिंग भी दी गई थी. गांवों के तालाबों से पवित्र मिट्टी लाकर 1008 गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं.
इन मूर्तियों को नगरवासियों को निशुल्क दिया जा रहा है. साथ ही लोगों को गमलों में इन गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किस तरह किया जाए, इसकी भी जानकारी दी गई है.
पीओपी से होता है पर्यावरण को नुकसान
विवेन कहती हैं कि मूर्तियां पीओपी (प्लास्टर ऑफ़ पेरिस) से और पंडाल सजावट की चीजें थर्मोकोल, प्लास्टिक और अन्य हानिकारक पदार्थों से बनी होती है. जो कि प्रकृति के लिए बहुत नुकसानदायक हैं. ऐसे में क्यों न हम कोई ऐसा तरीका अपनाए जिससे त्यौहार भी अच्छे मन जाए और प्रकृति की भी रक्षा हो जाए ? इसलिए ज़रूरी है कि हम प्रकृति के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझें और अपने त्यौहारों को पारम्परिक तरीकों से मनाएं.
हम ऐसे कदम उठाए जिससे कि हमारी श्रद्धा और आस्था का भी मान रहे और साथ ही, हमारी प्रकृति भी संरक्षित हो. बाज़ारों में भले ही आज इस गणपति उत्सव को मनाने के लिए हज़ारों तरीके उपलब्ध हैं, लेकिन इस त्यौहार को आप आसानी से घर में मौजूद पारम्परिक चीज़ों से भी मना सकते हैं. यह पर्यावरण के लिए हानिकारक भी नहीं है.
कौन है विभिन्न पारीक ?
विवेन पारीक का जन्म राजस्थान के नागौर ज़िले के मेडता शहर (मीरा नगरी) में 26 —11-2018 को हुआ । विवेन ने सर्वप्रथम अपने तीसरे जन्म दिन के उपलक्ष्य पर अपने घर पर एक तुलसी का पौधा लगाकर जन्म दिन मनाया
उसके पश्चात यह कार्यक्रम चलता रहा और वर्ष 2023 में पर्यावरण कार्यकर्ता उमा व्यास के मार्गदर्शन में श्री कलपतरु संस्थान से जुड़ी । विवेन प्रतिवर्ष अपने जन्मदिन व अन्य शुभ अवसरों पर पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है तथा अपने विचार व्यक्त करके पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संकल्प भी ले रही हैं ताकि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा हो सके और पर्यावरण को संरक्षण मिले इसके लिए प्रयास जारी है ।
विवेन अपने विचार साझा करके लोगों से अपील भी करती हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा पौधे लगाएं और पर्यावरण बचायें ।
विवेन को वर्ष 2023 में संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वर्ष मित्र सम्मान मिला था। इसी क्रम में पर्यावरण कार्यकर्ता उमा व्यास के मार्गदर्शन में संस्थान द्वारा ग्रीन बचपन अभियान शुरू किया । जिसका नेतृत्व विवेन को सौंपा गया और अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया ।

विवेन ने अपना एक समूह बनाया है जिसमें 5-12 वर्ष के बच्चे शामिल हैं । जो सभी मिलकर इस अभियान के तहत कार्य करते हैं । जैसे छोटे छोटे पौधे लगाना और उन्हें पानी देना, पक्षियो के लिए परिंडे लगाना, दाना डालना । संस्थान की ओर से आयोजित एक पेड़ माँ के नाम अभियान में योगदान दिया ।
पक्षियों के लिए परिण्डा अभियान के तहत हर सुबह परिण्डो में दाना पानी डालकर सुबह की शुरुआत करना ।
इस अभियान में शामिल होने व कार्य करने के कारण कल्पतरु संस्थान की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किया गया ।
विवेन पारीक ने पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के लिए अपने घर के आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता अभियान प्रधानमंत्री नरेन्दर् मोदी के नेतृत्व में आयोजित स्वच्छता अभियान से प्रेरित होकर ग्रीन बचपन टीम के सदस्यों द्वारा समय समय पर आयोजित किया जाता है । जिससे समाज के लोगों को प्रेरणा मिलती है । गणेशोत्सव विसर्जन में भगवान की मूर्ति तालाब से मिट्टी लाकर घर में ही बनाकर व घर पर ही गमले में विसर्जन करके पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया ।
विवेन अपनी दादी जी व नानी जी से प्रेरित होकर तुलसी पूजन व विवाह किया और निरंतर इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं ।






