नोटिस बेअसर, नियमों का खुलेआम हो रहा है उल्लंघन
डी-58, शांति पथ, राजापार्क में अवैध निर्माण जोरों पर, मालवीय नगर जोन की कार्रवाई कटघरे में

हिंद रफ्तार,जयपुर
मालवीय नगर निगम जोन के अंतर्गत आने वाले “शांति पथ, राजापार्क स्थित भूखंड संख्या डी-58” पर बिना अनुमति के निर्माण कार्य बेखौफ जारी है। हैरानी की बात यह है कि निगम प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद निर्माण गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा है, जिससे प्रशासनिक सख्ती पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, संबंधित भूखंड पर बहुमंजिला निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। निर्माण स्थल पर लगातार मजदूरों की आवाजाही, सामग्री की सप्लाई और फिनिशिंग कार्य खुलेआम किए जा रहे हैं। सुत्रों का कहना है कि यह निर्माण लंबे समय से चल रहा है, लेकिन निगम की ओर से केवल औपचारिक नोटिस देकर खानापूर्ति की जा रही है।

नियमों की खुलेआम अनदेखी
नगर निगम अधिनियम और भवन निर्माण से जुड़े प्रावधानों के तहत बिना स्वीकृत नक्शे के किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध माना जाता है। इसके बावजूद डी-58 पर जारी निर्माण यह दर्शाता है कि नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सवाल यह भी उठता है कि जब नोटिस जारी हो चुका है, तो फिर निर्माण कार्य को रुकवाने के लिए सीलिंग या ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
प्रशासनिक निष्क्रियता या मिलीभगत?
स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि निगम अधिकारियों की लापरवाही या संभावित मिलीभगत के चलते ही निर्माणकर्ता इतने बेखौफ होकर कार्य कर रहा है। यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अन्य अवैध निर्माणकर्ताओं के लिए भी गलत संदेश साबित हो सकता है।
क्षेत्र में बढ़ रहा अवैध निर्माण का ग्राफ
मालवीय नगर जोन में अवैध निर्माणों की बढ़ती संख्या पहले से ही चिंता का विषय बनी हुई है। कई स्थानों पर बिना अनुमति के फ्लैट्स और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तैयार किए जा रहे हैं, जिन पर समय पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। डी-58 का मामला इसी श्रृंखला की एक और कड़ी के रूप में सामने आया है।
निगम का पक्ष
इस संबंध में जब मालवीय नगर जोन के अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, मौके पर निर्माण कार्य का जारी रहना निगम के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।
डी-58 पर चल रहे अवैध निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, भवन को सील किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व निर्माणकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर अंकुश लगाया जा सके।





