राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत से राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आज सुबह मुलाकात की। जोधपुर में दोनों के बीच करीब 20 मिनट बातचीत हुई।
बता दें कि RSS प्रमुख मोहन भागवत 1 सितंबर से जोधपुर में 9 दिवसीय प्रवास पर हैं। जोधपुर में 5 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक होने वाली है, जिसमें संघ परिवार के 32 संगठनों के शीर्ष नेता और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल होंगे।
इससे पहले राजे से मुलाकात होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। संघ प्रमुख 3 सितंबर की दोपहर जोधपुर पहुंचे थे। इसके कुछ घंटे बाद ही पूर्व सीएम राजे भी जोधपुर पहुंची थी।
समन्वय बैठक से पहले ये मुलाकात खास!
मोहन भागवत से वसुंधरा राजे की यह मुलाकात देश की राजनीति में एक नई समीकरण का संकेत देती है। यह संघ की बढ़ती भूमिका और भाजपा के भीतर शक्ति संतुलन में बदलाव की ओर इशारा कर रही है। जोधपुर में हो रही अखिल भारतीय समन्वय बैठक में इस दिशा में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
यह मुलाकात न सिर्फ राजस्थान बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण गढ़ सकती है और भाजपा के भविष्य की रणनीति को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, यह समय बताएगा कि क्या यह मुलाकात वास्तव में वसुंधरा राजे के राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका की शुरुआत है या फिर यह केवल पार्टी के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश है।
मुलाकात के राजनीतिक संकेत
1. बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की संभावना
सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत यह है कि वसुंधरा राजे को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की दिशा में संघ की मुहर लग रही है। सूत्रों के अनुसार, आरएसएस की पहली पसंद वसुंधरा राजे हैं जबकि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह शिवराज सिंह चौहान का समर्थन कर रहे हैं।
संघ के पूर्व नेताओं का मानना है कि वसुंधरा राजे संघ निष्ठ हैं और पार्टी को विचारधारा के स्तर पर मजबूत बना सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो वे भाजपा की पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगी।
2. मोदी-शाह खेमे से तालमेल की कोशिश
वसुंधरा राजे के मोदी-शाह के साथ संबंध कभी बेहद सहज नहीं रहे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में वे मुख्यमंत्री पद की सबसे बड़ी दावेदार थीं लेकिन पार्टी हाईकमान ने भजनलाल शर्मा को सीएम बनाया। हाल ही में राजे ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह से मुलाकात की है जो इस बात का संकेत है कि पार्टी उन्हें एडजस्ट करने की कोशिश में है।
3. संघ-बीजेपी के बीच संतुलन की राजनीति
इस मुलाकात से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि संघ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर अपनी पसंद थोपने में सफल हो रहा है। मोहन भागवत के हालिया बयान में उन्होंने कहा था कि “हिंदू राष्ट्र का सत्ता से कोई लेना-देना नहीं”, जो भाजपा को एक संदेश भी था।






