एकीकृत जल प्रबंधन से बदलेगी राजस्थान की तस्वीर, जल सुरक्षा और कृषि समृद्धि को मिलेगी नई दिशा

हिंद रफ्तार
जयपुर। राजस्थान सरकार ने जल संकट से स्थायी समाधान और कृषि क्षेत्र को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश में एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन को मिशन मोड में लागू करने की तैयारी तेज कर दी है। सोमवार को सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित राजस्थान नदी बेसिन एंड वाटर रिसोर्सेज प्लानिंग अथॉरिटी की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में जल सुरक्षा, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई दक्षता और अधूरी जल परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

मुख्य सचिव ने सभी 11 संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक नदी बेसिन के लिए समग्र एवं वैज्ञानिक योजना तैयार कर सीमित जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि ‘विकसित राजस्थान@2047’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए जल संसाधनों का संरक्षण, समन्वित प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग समय की आवश्यकता है।

हर बूंद का होगा बेहतर उपयोग
बैठक में कृषि क्षेत्र में जल दक्षता बढ़ाने के लिए ड्रिप, स्प्रिंकलर और सोलर आधारित पाइपलाइन योजनाओं के व्यापक विस्तार पर बल दिया गया। साथ ही किसानों को क्षेत्रवार जल उपलब्धता के अनुसार कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों को अपनाने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने भूजल पर बढ़ती निर्भरता कम करने के लिए नदियों और जलाशयों के सतही जल के अधिकतम उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे प्रदेश के डार्क जोन क्षेत्रों की समस्या कम होगी और पेयजल सुरक्षा भी मजबूत होगी।
16 नदी बेसिन योजनाओं का होगा आधुनिकीकरण
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी 16 नदी बेसिनों की योजनाओं का आधुनिक तकनीकों के अनुरूप अद्यतन किया जा रहा है। इसके माध्यम से लगभग 2.9 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई कमांड क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

माही, चंबल, इंदिरा गांधी नहर और नर्मदा परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में विभिन्न प्रमुख नदी बेसिनों और जल परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई
माही बेसिन के अधिशेष जल को जयसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, जवाई बांध और लूनी बेसिन तक पहुंचाने की योजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई।
उत्तर संभाग में रावी, व्यास और सतलज से मिलने वाले जल की उपलब्धता का आकलन किया गया।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन चार जल संग्रहण संरचनाओं की जानकारी प्रस्तुत की गई।
चंबल बेसिन की समीक्षा के दौरान राणा प्रताप सागर से बीसलपुर बांध तक प्रस्तावित ब्राह्मणी परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।
जोधपुर संभाग में बांडी और जोजरी नदी के प्रदूषण नियंत्रण, डी-स्लजिंग, एसटीपी संचालन तथा मुख्यधारा चैनल निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
नर्मदा नहर परियोजना की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई।





