आम आदमी पार्टी ने राज्य की भाजपा सरकार पर जनता से विश्वासघात करने और बुजुर्गों की पेंशन रोककर उन्हें आर्थिक अंधकार में धकेलने का आरोप लगाया है।पार्टी ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा जारी आदेश,जिसमें वार्षिक बिजली बिल ₹24,000 या उससे अधिक होने पर पेंशन निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं,गरीबों और बुजुर्गों की गरिमा पर सीधा हमला है।

राज्य की रिपोर्ट के अनुसार 3,02,000 पेंशन लाभार्थियों में से 2,05,998 परिवारों के वार्षिक बिजली बिल ₹24,000 से अधिक बताए गए हैं।आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर किसी पेंशनर के नाम पर बिजली कनेक्शन है,लेकिन उसका बिल परिवार का कोई और सदस्य भरता है,तो पेंशनर का क्या दोष?
क्या भाजपा सरकार को यह नहीं पता कि आज भी राजस्थान में अधिकांश लोग संयुक्त परिवारों में रहते हैं?
प्रदेश प्रभारी धीरज टोकस ने कहा कि दीपावली के अवसर पर जब सरकार को जरूरतमंदों के घरों में उजाला करना चाहिए था,तब भाजपा सरकार ने पेंशन रोककर उनके घरों के दीए ही बुझा दिए भाजपा जनता की मदद करने की बजाय उनसे मदद छीन रही है।यह फैसला उन बुजुर्गों और विधवाओं के साथ क्रूर मज़ाक है जो पेंशन के सहारे अपनी जिंदगी चला रहे हैं।
सहप्रभारी घनेंद्र भारद्वाज ने कहा कि भाजपा का झूठ एक बार फिर बेनकाब हुआ है।दिल्ली चुनावों में महिलाओं को 2500 मासिक पेंशन देने का वादा किया गया था,लेकिन सत्ता में आते ही वह वादा भुला दिया गया।अब राजस्थान में भी वही धोखा दोहराया जा रहा है।
*आम आदमी पार्टी ने सरकार के सामने रखी मांगें*
1.सरकार तुरंत आदेश वापस ले और पेंशन निलंबन की कार्रवाई रोके।
2.बिजली बिल को “आय का प्रमाण” मानने की व्यवस्था समाप्त की जाए।
3.जिनकी पेंशन रोकी गई है,उन्हें तुरंत पुनः भुगतान किया जाए।
4.जांच प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए और पैमानों को सार्वजनिक किया जाए।
आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने यह जनविरोधी आदेश वापस नहीं लिया,तो राज्यभर में आंदोलन की मशाल जलाई जाएगी — ताकि इस दीपावली जनता के घरों का उजाला कोई सरकारी आदेश न छीन सके।






