जयपुर आए उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की बात की जा रही है। इस विषय पर हमारे जैसे परिवारों पर खूब अंगुलियां उठाई गई। खूब बातें बोली गई कि इन्होंने महिलाओं को आगे आने नहीं दिया, उन्हें हमेशा दबा के रखा। 1980 के दशक की फिल्मों में भी यह काम बहुत ही बखूबी दर्शाया गया है।
मेवाड़ जयपुर में कम्युनिटी ड्रीमर्स की पहली एनिवर्सरी में हिस्सा लेने आए हैं। उनके साथ उनकी पत्नी निवृत्ति कुमारी और उनकी सास भी जयपुर पहुंचीं।
ठाकुरों को विलेन बताया
मेवाड़ ने कहा कि 1980 के दशक की फिल्मों में ठाकुरों को गांव का सबसे बड़ा अपराधी बताया गया, वह किस प्रकार लोगों को आगे नहीं आने देता है, उसे विलेन के रूप में दिखाया गया। 8 पीएम से लेकर अगली 8 पीएम तक वे क्या करते हैं, उसे भी अच्छी तरह से उन्होंने दिखाया। इसमें दिखाया कि वे काम नहीं करते हैं, अपराध करते हैं।

हमारे पूर्वजों ने बालिका शिक्षा के लिए पहली नींव रखी
उन्होंने कहा कि 1980 और 90 के दशक की फिल्मों ने इन चीजों काे प्रमुखता से दिखाया। खैर कोई बात नहीं, काम को आवाज या लफ्जों की जरूरत नहीं पड़ती। आज यह मौका है, जहां पर इसकी चर्चा होनी चाहिए। आज से 100 साल पहले हमारे पूर्वज महाराणा शंभू सिंह ने उदयपुर में बालिका शिक्षा के लिए पहली नींव रखी थी। उनका मानना था कि बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और वे सशक्त बने। आज हम बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी को आगे बढाने की बात करते हैं, मैं इस बात को फख्र से कहता हूं कि मेवाड़ का कण-कण इन शब्दों को जीता है। मेवाड़ बोलता नहीं है, करके दिखाता है।

लक्ष्यराज ने हिन्दी भाषा की पैरवी हुए कहा कि लोगों को अन्य भाषाएं सीखनी चाहिए। कई बार संस्कृति अपनी हो या पड़ोसी की हो, वह अपने से बात करती है। अंग्रेजी भाषा ए फॉर एपल से शुरू होती है और जेड फॉर जीरो पर खत्म होती है। यानी सेव से शुरू होकर शून्य पर खत्म होती है, जिसे हिन्दुस्तान ने बनाया है। आपकी और मेरी मां जो सिखाती है, वह यह है कि वे अ से अनपढ़ से शुरू करेंगी और ज्ञ यानी ज्ञानी पर खत्म करेंगी। यही हमारी भाषा की खूबसूरती है।

एक छत के नीचे कला और कलाकार मौजूद लक्ष्यराज ने कम्युनिटी ऑफ ड्रीमर्स’ की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि जयपुर के आर्टीजंस, शिल्पकार, उद्यमी और लघु व्यवसायी अब एक ही छत के नीचे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के साथ-साथ अपने व्यवसायों के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। इससे न केवल उनके व्यवसायों को पंख लगेंगे बल्कि स्थानीय कला और शिल्प को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इस अवसर पर ‘कम्युनिटी ऑफ ड्रीमर्स’ की फाउंडर्स कल्पना पीलवा और संध्या दिलीप और ‘कम्युनिटी ऑफ ड्रीमर्स के संरक्षक, सुधीर माथुर भी मौजूद रहे।

स्टार्टअप और आर्टिजंस के लिए बनाया मंच फाउंडर्स कल्पना पीलवा और संध्या दिलीप ने बताया कि ‘द शॉप’ में करीब 24 स्थानीय ब्रांड्स, एनजीओ, शिल्पकार और उद्यमी अपनी कला और प्रोडक्ट्स प्रदर्शित कर रहे हैं। वहीं कुछ एनजीओ को यहां अपने प्रोडक्ट्स को शोकेस करने के लिए निशुल्क स्पेस भी उपलब्ध कराया गया है। इस स्टोर के माध्यम से हमारा उद्देश्य छोटे उद्यमियों, व्यवसायों, एनजीओ और शिल्पकारों को एक गतिशील और सहायक वातावरण प्रदान करना है।






